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कैसे गुज़ारते हैं दिन अंतरिक्ष यात्री, kaise jhite rehete hai antariksh mein loog



कैसे गुज़ारते हैं दिन अंतरिक्ष यात्री आइए जानते हैं कुछ रोचक बातें


नमस्कार दोस्तों दोस्तों अब तक के 26 परीक्षणों में लगभग 350 से ज्यादा लोग अंतरिक्ष में जाना आना कर रहे हैं, और आपको बता दें अंतरिक्ष में जाने वाले इंसानों को हर तरह से तंदूरुस्त होना चाहिए, और उन्हें इसके लिए ट्रेनिंग भी दी जाती है, लेकिन दोस्तों क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है, कि जो लोग अंतरिक्ष में जाते हैं वहां पर कैसे रहते हैं, कितने मुश्किलों का सामना करते हैं क्या खाते हैं उनका वस्त्र कैसा होता है, वह सोते कैसे हैं या अन्य कई सारी बातें, तो दोस्तों बिना समय गवाए चलिए जानते हैं मगर उससे पहले अगर आपने अभी तक हमें पता नहीं किया है तो नीचे बटन पर क्लिक करके हमें फॉलो करें .

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सबसे पहले जानते हैं कि अंतरिक्ष में रहते कैसे हैं, अंतरिक्ष में भी इंसान उसी तरह से जीता है जैसे पृथ्वी पर लेकिन कुछ बदलाव के साथ, आप सब जानते ही हैं कि अंतरिक्ष में ग्रैविटी नहीं होती, और एस्ट्रोनॉट हवा में तैरते रहते हैं, ग्रैविटी को नियंत्रण करने के लिए रबर वाला जूता पहना जाता है, अंतरिक्ष यात्री का खाना 70 अलग अलग तरह का होता है और 20 प्रकार के पीने वाली सामग्री होती है .

अंतरिक्ष यात्रियों के वस्त्र खास होता है, इनके वस्त्र इस तरह बनाए जाते हैं कि शरीर की गर्मी और ऑक्सीजन बाहर ना जाए, इसीलिए पूछा को अलग-अलग भाग में बनाया जाता है ताकिअंतरिक्ष यात्रियों को इसको पहनने में आरामदायक हो, स्पेस स्वीट यानि अंतरिक्ष पोशाक साधारण पोशाक से बहुत भारी होता है, लेकिन जो की अंतरिक्ष में ग्रैविटी नहीं होती इसलिए यह एकदम हल्का लगता है, इसकी बनावट कुछ इस तरह का होता है, पहला हिस्सा होता है लिक्विड कूल्ड अंडर गारमेंट्स, दूसरा दूसरा छाती के तरफ दो छेद होते हैं जहां से पानी अंदर जा सके और बाहर भी आ सके, उसी तरह दूसरा भी छेद से ऑक्सीजन को अंदर भेजा जाता है और बाहर भी निकाला जाता है, हाथ के तरफ रिष्ट क्लैंप होते हैं जिससे हाथ के दूसरे हिस्सों को जोड़ा जा सकता है, पैर की तरफ होता है यूरीन ट्रांसफर कनेक्शन जहां से मूत्राशय बाहर जा सकता है .

कैसे गुज़ारते हैं दिन अंतरिक्ष यात्री, kaise jhite rehete hai antariksh mein loog

हर एक अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में हर तरह का काम कर सकता है जैसे कि अंतरिक्ष यान को उड़ाना, उसकी देखभाल करना, अगर दुर्भाग्यवश तकनीकी खराबी आ जाए तो भी उसे ठीक करना, वैसे तो सेटेलाइट जल्दी खराब नहीं होती लेकिन उसके एक निर्धारित समय होते हैं, इसीलिए समय-समय पर उसे ठीक करने की जरूरत होती है, और उसे सुधारने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को काफी सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, सैटेलाइट को ठीक करने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को अपने यान से बाहर जाना पड़ता है, अंतरिक्ष यान से को बिछड़ ना जाए इसलिए उनके शरीर पर एक मोटी रस्सी जुड़ी होती है, आपको बता दें अगर यह रस्सी गलती से भी टूट जाती है तो उनकी जान जा सकती है, ज़रा सोचिए दोस्तों अंतरिक्ष यात्री कितने मुश्किलों का सामना करते हैं, और हम सब तो अभी तक कष्ट का मतलब ही नहीं समझे है, उम्मीद है आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद आपका दिन शुभ हो .

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कैसे गुज़ारते हैं दिन अंतरिक्ष यात्री, kaise jhite rehete hai antariksh mein loog कैसे गुज़ारते हैं दिन अंतरिक्ष यात्री, kaise jhite rehete hai antariksh mein loog Reviewed by Science Fiction on February 03, 2019 Rating: 5

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