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पनडुब्बी के अंदर सैनिकों की जिंदगी कैसी होती है, जानकर आपके होश उड़ जाएगी | Knowing how the soldiers are inside the submarine, your senses will fly away.


पनडुब्बी के अंदर सैनिकों की जिंदगी कैसी होती है, जानकर आपके होश उड़ जाएगी

नमस्कार दोस्तों, दोस्तों क्या आप कभी ऐसी जगह पर जाना चाहोगे, जहां से लौटने का कोई निर्धारित समय ना हो और आपके चारों तरफ सिर्फ पाने के अलावा और कुछ ना हो, खाने की कमी और जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन भी नियमित हो, तो आप शायद बोलोगे नहीं, लेकिन दोस्तों हमारे दुनिया में कुछ लोग हैं जो इन सब ख़तरों का सामना हर दिन करते हैं, और हम उन्हें सैनिक कहते हैं, तो दोस्तों चले बिना समय गवा है जानते हैं किस सैनिक आखिर पनडु्बी के अंदर कैसे जीवन बिताते हैं, मगर उससे पहले अगर आपने अभी तक हमें फॉलो नहीं किया है तो नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके हमें फॉलो करें .

Knowing how the soldiers are inside the submarine, your senses will fly away.





सबसे पहले हम सब-मरीन के बारे में जान लेते हैं, दोस्तों पनडुब्बी एक जलिय यान है जो पानी के ऊपर और पानी के गहराई में भी चल सकता है, पानी की गहराई मापना दुश्मनों पर निगरानी रखना इसकी मुख्य काम होता है, सब-मरीन बनाने का श्रेय गोरडनिलियस-डेरीवल को जाता है जिन्होंने 1620 में पहला नेविगेबल सब-मरीन बनाया था, और पहला पनडुब्बी लकड़ी से बनाया गया था जिसके चारों तरफ चमड़ी से ढका गया था, और यह पानी में 3 से 4 मीटर तक अंदर तैर सकता था, उसके बाद धीरे-धीरे पनडुब्बी के दुनिया में क्रांति होने लगा, और 1880 में भाप से चलने वाले पनडुब्बी बनाया गया, फिर धीरे-धीरे गैसोलीन डीजल इलेक्ट्रिक से चलने वाली सब-मरीन बनाए गए .


पहला विश्व-युद्ध में सब-मरीन का इस्तेमाल किया गया था, उसके बाद 1950 में पहली बार न्यूक्लियर सब-मरीन बनाया गया, जिसकी वजह से सब-मरीन पानी से ऑक्सीजन लेना और कई महीनों तक समुद्र के अंदर रहने में कामयाब हो गई, और आज के एडवांस पनडुब्बी में टेलीस्कोप पेरीस्कोप सोनार जैसे उपकरण मौजूद होता है, पेरीस्कोप के मदद से समुद्र में हर एक हलचल का पता लगाया जाता है और सोनार के मदद से बाकी पनडुब्बी की मौजूदगी और युद्ध करने वाली मिसाइल का पता लगाया जा सकता है .

न्यूक्लियर सब-मरीन से निकलने वाली ग्यास किसी भी तरह का नुकसान नहीं करती, देश की रक्षा के लिए सैनिकों की जरूरत होती है, लेकिन क्या आपको पता है नौसेना देश को बचाने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना करते हैं, समुद्र के रास्ते से आने वाले दुश्मनों से बचने के लिए नौसैनिक पानी के अंदर निगरानी रखते हैं, जिसके लिए उन्हें पनडुब्बी की जरूरत पड़ती है, कई बार इन नौ-सैनिकों को ऐसी मिशन पर भेजा जाता है जिसके बारे में उन्हें पता ही नहीं होता, और इसीलिए उन्हें मिशन को अंजाम देने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है .

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एक मिशन कई दिनों तक या फिर कभी कभी 1 महीने से भी ज्यादा चलता है, नौ-सैनिकों को कई दिनों तक सूरज की किरण नसीब नहीं होती, पनडुब्बी में काफी सारे उपकरण जैसे मिसाइल या अन्य युद्ध सामग्री मौजूद होती हैं, और इसीलिए पनडुब्बी में जागा बहुत कम होता है एक नौसैनिक को दिन में 4 से लेकर 5 घंटा वह भी मुश्किल से सोने को मिलता है, शयन कक्ष काफी छोटा होता है और उस छोटे से कक्षा में 6 लोगों के लिए सोने की व्यवस्था की जाती है, नौ-सैनिकों को कम मसाला वाला खाना दिया जाता है क्योंकि पनडुब्बी में खाना लिमिटेड होता है, अगर बनाया हुआ खाना उपलब्ध ना हो तो पैकेट खाना मौजूद होता है, खाना खाने के लिए किसी भी सैनिक को 12 से लेकर 15 मिनट का वक्त मिलता है, इसके अलावा एक नौसैनिक को महीने में दो से तीन बार ही समान करने की इजाज़त मिलता है वह भी सबकी सहमति से, क्यों की पनडुब्बी में पानी की मात्रा कम होता है .

नौ-सैनिकों का कपड़ा एक खास तरह का केमिकल से डूबा हुआ होता है जो उन्हें बैक्टीरिया या अन्य बीमारियों से दूर रखता है, और यह कपड़ा दो से 3 दिन के बाद फेंक दिया जाता है, कई दिनों तक बिना नहाए हुए रहने के वजह से नौ सैनिकों के बॉडी में दर्द शुरू हो जाता है, वैसे आपको बता दें भारत का पहला पनडुब्बी जिसका नाम आई एन एस अरिहंत है, अरिहंत का मतलब दुश्मनों को मार गिरा-ना है .

पनडुब्बी के अंदर सैनिकों की जिंदगी कैसी होती है, जानकर आपके होश उड़ जाएगी | Knowing how the soldiers are inside the submarine, your senses will fly away.

यह इंडिया का पहला ऐसा पनडुब्बी है जो जल थल और आसमान तीनों लेवल की सुरक्षा कर सकता है, और इस का कुल वजन 6000 टन है, अरिहंत में 750 किलोमीटर रेंज की 15 मिसाइल और 3500 किलोमीटर रेंज की चार मिसाइल मौजूद है, भारत में न्यूक्लियर मिसाइल के 1970 में शुरू हुआ था, और इसका निर्माण सीक्रेट एडवांस टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट व्हिसिल के तहत 90 के दशक में शुरू किया गया, और इस पनडुब्बी को पहली बार 2009 में विशाखा-पट्टनम में बिल्डिंग सेंटर से लॉन्च किया गया था .

तो दोस्तों आपने देखा हमें और हमारे देश को सुरक्षित रखने के लिए नौ-सैनिक कितनी मेहनत करते हैं, अपना घर परिवार से दूर सारे ऐसों आराम को ठुकरा कर अपना जान दाँव पर लगाते हैं, हमें उन पर गर्व करना चाहिए, हमें उन्हें रेस्पेक्ट देना चाहिए, उम्मीद करता हूं आप इस बात से सहमत होंगे, जय हिंद, वन्दे-मातरम् .
पनडुब्बी के अंदर सैनिकों की जिंदगी कैसी होती है, जानकर आपके होश उड़ जाएगी | Knowing how the soldiers are inside the submarine, your senses will fly away. पनडुब्बी के अंदर सैनिकों की जिंदगी कैसी होती है, जानकर आपके होश उड़ जाएगी | Knowing how the soldiers are inside the submarine, your senses will fly away. Reviewed by Science Fiction on February 01, 2019 Rating: 5

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